• शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार करना और छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना।

  • सामाजिक रूप से पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक शिक्षा की पहुँच बनाना।

  • राष्ट्रीय मूल्यों, अनुशासन और नैतिक शिक्षा को शिक्षण का अभिन्न अंग बनाना।

  • छात्रों में प्रतिस्पर्धात्मक भावना विकसित करते हुए उन्हें शैक्षणिक और व्यावसायिक रूप से सफल होने के लिए तैयार करना।